
प्रयागराज में कुदरत का कहर: आसमान से बरसती आग
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज इस समय भीषणतम गर्मी के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ दिनों से शहर का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अब यह 45 डिग्री सेल्सियस के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है। स्थिति यह है कि सुबह 10 बजते ही सूरज के तेवर इतने तल्ख हो जाते हैं कि सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगता है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे ‘हीटवेव’ (Heatwave) की गंभीर स्थिति करार दिया है।
प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति और कंक्रीट के बढ़ते जाल ने शहर को एक ‘गर्म भट्टी’ में तब्दील कर दिया है। लू के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। दोपहर के समय गर्म हवाएं (पछुआ पवनें) शरीर को झुलसा रही हैं।
तापमान का तांडव: टूट रहे हैं पुराने रिकॉर्ड
मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, प्रयागराज उत्तर प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में शीर्ष पर बना हुआ है।
| समय | औसत तापमान (डिग्री सेल्सियस) | स्थिति |
| सुबह 08:00 | 32°C | उमस भरी शुरुआत |
| दोपहर 12:00 | 41°C | भीषण लू |
| दोपहर 03:00 | 45.5°C | उच्चतम स्तर (Peak) |
| शाम 07:00 | 38°C | गर्म हवाएं जारी |
जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में पारा 47-48 डिग्री तक भी जा सकता है। रात के तापमान में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे चैन नहीं मिल रहा है।
थम गई शहर की रफ्तार: जनजीवन पर असर
भीषण गर्मी का सीधा असर शहर की अर्थव्यवस्था और दैनिक गतिविधियों पर पड़ा है।
- बाजारों में सन्नाटा: सिविल लाइंस, चौक, कटरा और मुट्ठीगंज जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या में 60-70% की गिरावट आई है।
- परिवहन सेवा प्रभावित: ई-रिक्शा, ऑटो और बस सेवाओं में यात्रियों की कमी देखी जा रही है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग ट्रेनों और बसों में सफर करने से कतरा रहे हैं।
- मजदूरों पर मार: निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन ने हालांकि दोपहर 12 से 4 बजे तक काम न करने की सलाह दी है, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग का ‘रेड अलर्ट’: डॉक्टरों की चेतावनी
प्रयागराज के प्रमुख अस्पतालों (स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल और कॉल्विन अस्पताल) में हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या में 40% का इजाफा हुआ है।
डॉक्टरों की मुख्य सलाह:
प्रसिद्ध फिजिशियन के अनुसार, इस मौसम में ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगना) सबसे बड़ा खतरा है। इसके लक्षणों और बचाव पर डॉक्टरों ने निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए हैं:
“शरीर में पानी की कमी न होने दें। यदि आपको चक्कर आए, तेज सिरदर्द हो या मितली महसूस हो, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें। यह साधारण थकान नहीं, बल्कि जानलेवा हीटस्ट्रोक हो सकता है।”
क्या करें और क्या न करें?
- खूब पानी पिएं: प्यास न लगने पर भी पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी और छाछ का सेवन करें।
- पहनावा: सूती और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर को तौलिये या टोपी से ढकें।
- खाली पेट न निकलें: घर से बाहर निकलने से पहले कुछ हल्का नाश्ता जरूर करें।
- कैफीन से बचें: अत्यधिक चाय, कॉफी या शराब का सेवन शरीर को डिहाइड्रेट करता है, इनसे परहेज करें।
पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर संकट
आसमान से बरसती आग ने न केवल इंसानों बल्कि बेजुबान पशु-पक्षियों को भी संकट में डाल दिया है। तालाब और पोखरे सूखने की कगार पर हैं। शहर के विभिन्न चौराहों पर स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा पशुओं के लिए पानी की नांद रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण के कारण पेड़ों की कटाई ने ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ाया है, जिससे तापमान सामान्य से अधिक महसूस हो रहा है।
प्रशासन की तैयारी
जिला प्रशासन ने गर्मी को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- मुख्य चौराहों पर पीने के पानी (प्याऊ) की व्यवस्था।
- अस्पतालों में ‘हीटवेव वार्ड’ का गठन।
- बिजली कटौती को कम करने के निर्देश ताकि लोग पंखे और कूलर का उपयोग कर सकें।
- स्कूली बच्चों के लिए समय में बदलाव (सुबह 7:30 से 12:00 बजे तक)।

