गाजीपुर, 22 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक बड़ी और हिंसक खबर सामने आ रही है। यहां के करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब समाजवादी पार्टी (सपा) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (Delegation) निशा हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। गांव के बाहर ही ग्रामीणों और सपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक पत्थरबाजी और मारपीट में बदल गई।
घटना का पूरा विवरण: आखिर क्यों भड़की हिंसा?
जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल को निशा विश्वकर्मा नाम की एक युवती का शव गंगा नदी में मिला था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण इस मुद्दे पर हो रही ‘राजनीति’ से नाराज थे। ग्रामीणों का आरोप था कि बाहरी लोग और राजनीतिक दल गांव की शांति भंग कर रहे हैं।
बुधवार को जब पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा के नेतृत्व में सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव, विधायक जैकिशन साहू और वीरेंद्र यादव का डेलिगेशन गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने उन्हें गांव में प्रवेश करने से रोक दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि केवल प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ही अंदर जाएं, न कि सैकड़ों की संख्या में समर्थक। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और दोनों ओर से ईंट-पत्थर चलने लगे।
पूर्व मंत्री और पुलिसकर्मी हुए घायल
इस खूनी संघर्ष में सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा के सिर में गंभीर चोट आई है। उनके अलावा सपा नेता सत्य यादव, बिंदु बाला और दर्जनों कार्यकर्ता चोटिल हुए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस भी इस हिंसा की चपेट में आ गई। शहर कोतवाल महेंद्र सिंह और करंडा थानाध्यक्ष संतोष पाठक समेत कई जवान घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
अखिलेश यादव का पहला रिएक्शन: ‘न्याय की आवाज दबाने की साजिश’
इस घटना के कुछ ही घंटों बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का बयान सामने आया। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा:
“गाजीपुर में पीड़ित परिवार को सांत्वना देने जा रहे हमारे प्रतिनिधिमंडल पर हमला अत्यंत निंदनीय है। यह उत्तर प्रदेश में बढ़ते ‘जंगलराज’ का प्रमाण है। जब सरकार और प्रशासन न्याय दिलाने में विफल होते हैं, तो वे विपक्ष की आवाज को कुचलने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं। पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा जी और हमारे कार्यकर्ताओं पर हुआ यह जानलेवा हमला लोकतंत्र की हत्या है।”
उन्होंने आगे कहा कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की पत्थरबाजी होना साबित करता है कि हमलावरों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। अखिलेश ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
ग्राउंड रिपोर्ट: कटरिया गांव में तनाव का माहौल
फिलहाल पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एसपी सिटी डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पीएसी (PAC) तैनात की गई है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर पत्थरबाजों की पहचान कर रही है।

