जब कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो राज्यपाल (Governor) मूकदर्शक नहीं बना रह सकता। संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 राज्यपाल को ऐसी स्थितियों में ‘विवेकाधीन शक्तियां’ (Discretionary Powers) प्रदान करते हैं।
1. मुख्यमंत्री की बर्खास्तगी (Dismissal of the CM)
संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री राज्यपाल के “प्रसादपर्यंत” (Pleasure of the Governor) अपने पद पर बने रहते हैं।
- प्रक्रिया: यदि चुनाव परिणाम स्पष्ट हैं और सत्ताधारी दल बहुमत खो चुका है, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री को याद दिला सकते हैं कि उनके पास अब शासन करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
- कार्रवाई: यदि ममता बनर्जी फिर भी पद नहीं छोड़ती हैं, तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं। इसके बाद पूरी कैबिनेट स्वतः भंग हो जाती है।
2. विधानसभा भंग करना और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश
यदि राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो जाता है, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 का उपयोग कर सकते हैं।
- राष्ट्रपति शासन: राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता।
- वजह: निर्वाचित सरकार का इस्तीफा न देना और नई सरकार के गठन में बाधा डालना ‘संवैधानिक विफलता’ की श्रेणी में आता है।
3. सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का निमंत्रण
राज्यपाल के पास यह शक्ति है कि वह चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन (इस मामले में भाजपा) के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
- बहुमत का दावा: भाजपा के नेता (अमित शाह द्वारा नामित) राज्यपाल के पास जाकर अपना बहुमत पत्र सौंप सकते हैं।
- शपथ ग्रहण: राज्यपाल नए मुख्यमंत्री को शपथ दिला सकते हैं, जिसके बाद पुरानी सरकार का अस्तित्व कानूनी रूप से समाप्त हो जाएगा।
4. बहुमत परीक्षण का निर्देश (Floor Test)
हालाँकि चुनाव परिणाम स्पष्ट हैं, फिर भी एक औपचारिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं।
- यदि ममता बनर्जी सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाती हैं (जो परिणामों के बाद स्पष्ट है), तो उन्हें संवैधानिक रूप से पद छोड़ना ही होगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मुख्य विवरण
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
| कुल सीटें | 294 |
| बहुमत का आंकड़ा | 148 |
| भाजपा की सीटें | 207 (दो-तिहाई बहुमत) |
| TMC की स्थिति | सत्ता से बाहर (15 साल का शासन समाप्त) |
| विवाद का कारण | ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर साजिश का आरोप और इस्तीफे से इनकार |
आगे की कानूनी राह: चुनाव याचिका (Election Petition)
ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि वह कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेंगी। संविधान के अनुसार:
ध्यान दें: याचिका दायर करने का मतलब यह नहीं है कि मुख्यमंत्री अपने पद पर बनी रह सकती हैं। उन्हें पहले इस्तीफा देना होगा और नई सरकार को कार्यभार संभालने देना होगा। कोर्ट का फैसला आने तक वह मुख्यमंत्री नहीं रह सकतीं।
चुनाव परिणाम आने के 45 दिनों के भीतर याचिका दायर की जा सकती है।

