कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चुनावी हिंसा और आरोपों के घेरे में है। कोलकाता के एक मतगणना केंद्र के बाहर बीती रात जो कुछ भी हुआ, उसने राज्य की कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ (Tampering) करने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके बाद दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और शहर की सड़कों पर घंटों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
मुख्य बिंदु
- आरोप: बीजेपी का दावा है कि स्ट्रॉन्ग रूम के पिछले दरवाजे से बैलेट बॉक्स बदले गए।
- झड़प: कोलकाता के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी और बीजेपी समर्थकों में पत्थरबाजी और मारपीट।
- पुलिस की कार्रवाई: अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
- धरना: शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार ने रात भर मतगणना केंद्र के बाहर धरना दिया।
घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ उस रात?
घटना की शुरुआत तब हुई जब कोलकाता के एक स्थानीय निकाय उपचुनाव की मतगणना की तैयारी चल रही थी। रात करीब 11 बजे, बीजेपी के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम के पास कुछ संदिग्ध हलचल देखी है। बीजेपी का आरोप है कि सादे कपड़ों में कुछ लोग पुलिस की मिलीभगत से अंदर घुसे और बैलेट बॉक्स को बदलने की कोशिश की।
बीजेपी का रुख: ‘लोकतंत्र की हत्या’
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे। शुभेंदु अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“ममता बनर्जी की सरकार चुनाव हारने के डर से अब बैलेट बॉक्स चोरी करने पर उतर आई है। हमारे पास वीडियो फुटेज है जहाँ संदिग्ध लोग स्ट्रॉन्ग रूम के पास दिख रहे हैं। जब तक चुनाव आयोग जांच के आदेश नहीं देता, हम यहाँ से नहीं हटेंगे।”
टीएमसी का पलटवार: ‘हार का डर और नौटंकी’
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि बीजेपी अपनी संभावित हार को देखते हुए पहले से ही बहाने बना रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ता बेवजह स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में लगे जवानों के साथ बदसलूकी कर रहे थे और माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
सड़कों पर संग्राम: पत्थरबाजी और लाठीचार्ज
जैसे-जैसे रात चढ़ती गई, दोनों पार्टियों के सैकड़ों कार्यकर्ता वहां जमा हो गए। नारेबाजी जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों तरफ से ईंट और पत्थर फेंके गए। स्थिति को देखते हुए कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। जब प्रदर्शनकारियों ने हटने से मना कर दिया, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं और कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आने की खबर है।
सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आयोग की भूमिका
पश्चिम बंगाल में चुनाव और हिंसा का पुराना नाता रहा है। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर केंद्रीय बलों (Central Forces) की तैनाती बढ़ा दी गई है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रही है।
विश्लेषण: आखिर क्यों बार-बार होता है बंगाल में ऐसा?
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जमीनी स्तर पर इतनी गहरी है कि हर छोटा चुनाव भी युद्ध जैसा लगने लगता है।
- बूथ कैप्चरिंग का इतिहास: राज्य में दशकों से धांधली के आरोप लगते रहे हैं।
- ध्रुवीकरण: बीजेपी और टीएमसी के बीच का वैचारिक टकराव अक्सर हिंसा का रूप ले लेता है।
- प्रशासनिक साख: पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठना यहाँ एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है।

