IMF GDP Ranking: भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा फेरबदल, 6वें स्थान पर पहुंचा देश; जानें गिरावट की असली वजह

IMF GDP Ranking: भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा फेरबदल, 6वें स्थान पर पहुंचा देश; जानें गिरावट की असली वजह

नई दिल्ली/लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2026 की ताज़ा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (World Economic Outlook) रिपोर्ट ने वैश्विक आर्थिक जगत में हलचल मचा दी है। पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की 5वीं और कभी चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहे भारत के लिए इस बार के आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। आईएमएफ के मुताबिक, भारत अब वैश्विक जीडीपी रैंकिंग में फिसलकर 6वें स्थान पर आ गया है।

इस खबर के सामने आते ही देश के आर्थिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। एक ओर जहां यह चिंता का विषय है कि भारत ब्रिटेन (UK) से पीछे हो गया है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इसे ‘सांख्यिकीय बदलाव’ (Statistical Shift) करार दे रहे हैं।

रैंकिंग में गिरावट: क्या कहता है आंकड़ा?

आईएमएफ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के लिए विभिन्न देशों की नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के अनुमान कुछ इस प्रकार हैं:

रैंकदेशजीडीपी (ट्रिलियन डॉलर में)
1अमेरिका$31.27
2चीन$20.27
3जर्मनी$5.08
4जापान$4.38
5यूनाइटेड किंगडम (UK)$4.26
6भारत$4.15

पिछले आंकड़ों में भारत $4 ट्रिलियन के आंकड़े को पार कर गया था, लेकिन ताज़ा रैंकिंग में ब्रिटेन $4.26 ट्रिलियन के साथ फिर से 5वें स्थान पर काबिज हो गया है।

क्यों गिरी भारत की रैंकिंग? ये हैं 3 मुख्य कारण

रैंकिंग में इस गिरावट के पीछे कोई औद्योगिक विफलता नहीं, बल्कि कुछ गणितीय और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं:

1. डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी

वैश्विक जीडीपी रैंकिंग ‘नॉमिनल डॉलर’ में मापी जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 11% तक कमजोर हुआ है। भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था घरेलू स्तर (रुपये में) मजबूत हो रही हो, लेकिन जब उस मूल्य को डॉलर में बदला जाता है, तो कमजोर रुपये के कारण कुल जीडीपी का आकार छोटा दिखने लगता है।

2. जीडीपी बेस ईयर (Base Year) में बदलाव

फरवरी 2026 में भारत सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने जीडीपी गणना के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया था। नई गणना पद्धति के कारण भारत की नॉमिनल जीडीपी के अनुमान में लगभग 4% की तकनीकी कमी आई है। पुराने आंकड़ों के हिसाब से जो अर्थव्यवस्था ₹357 लाख करोड़ की थी, वह नए बेस ईयर के अनुसार ₹345.5 लाख करोड़ आंकी गई।

3. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सुधार

ब्रिटिश पाउंड की मजबूती और वहां की नॉमिनल ग्रोथ में आए उछाल ने यूके को भारत से थोड़ा आगे निकलने में मदद की। हालांकि, यह अंतर बहुत कम है।

सिक्के का दूसरा पहलू: ‘सबसे तेज़’ का टैग अब भी भारत के पास

भले ही रैंकिंग में भारत एक पायदान नीचे आया हो, लेकिन आईएमएफ ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

  • रियल जीडीपी ग्रोथ: भारत की वास्तविक विकास दर 2026 में 6.5% रहने का अनुमान है, जो अमेरिका, चीन और जर्मनी से कहीं अधिक है।
  • वैश्विक औसत से बेहतर: जहां दुनिया की औसत विकास दर 3.1% रहने की उम्मीद है, वहीं भारत की रफ्तार दोगुनी से भी ज्यादा है।
  • 4 ट्रिलियन का सपना: मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि भारत जल्द ही इस सांख्यिकीय गिरावट से उबर जाएगा और 2027 तक फिर से अपनी खोई हुई रैंकिंग हासिल कर लेगा।

विपक्ष और विशेषज्ञों की राय

अर्थव्यवस्था में आई इस गिरावट और रुपये की कमजोरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आलोचकों का तर्क है कि डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार गिरना आयात को महंगा बना रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रहा है। हालांकि, अर्थशास्त्री कहते हैं कि लंबी अवधि में भारत के बुनियादी ढांचे (Fundamentals) मजबूत हैं और यह केवल एक अस्थायी दौर है।

भविष्य की राह: 2031 तक तीसरी बड़ी इकोनॉमी?

आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक दोनों का अनुमान है कि मध्यम अवधि में भारत की स्थिति बहुत मजबूत है। अनुमान लगाया जा रहा है कि:

  • 2027 तक: भारत फिर से ब्रिटेन और जापान को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर आएगा।
  • 2031 तक: भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

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