गांधीनगर/अहमदाबाद: गुजरात में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले हुए ‘मिनी असेंबली’ यानी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP), जो गुजरात में ‘तीसरी शक्ति’ के रूप में उभरने का दावा कर रही थी, उसे इन चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। वहीं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य के सभी 15 नगर निगमों समेत जिला और तालुका पंचायतों में क्लीन स्वीप कर अपनी बादशाहत बरकरार रखी है।
मुख्य आकर्षण
- सभी 15 नगर निगमों पर BJP का कब्जा: अहमदाबाद, सूरत, राजकोट समेत सभी बड़े शहरों में बीजेपी की प्रचंड जीत।
- सूरत में AAP का पतन: 2021 में 27 सीटें जीतने वाली AAP इस बार मात्र 4 सीटों पर सिमटी।
- ग्रामीण इलाकों में भी ‘कमल’: 34 जिला पंचायतों में से 33 पर बीजेपी का कब्जा, AAP को केवल 1 सीट मिली।
- विधानसभा 2027 की राह कठिन: निकाय चुनावों के इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा था।
निकाय चुनाव परिणाम: एक नजर में
28 अप्रैल 2026 को घोषित हुए नतीजों के अनुसार, गुजरात की 9,992 सीटों में से बीजेपी ने लगभग 7,500 सीटों पर जीत दर्ज की है।
| निकाय का प्रकार | कुल सीटें/इकाई | BJP की जीत | Congress की स्थिति | AAP का प्रदर्शन |
| नगर निगम | 15 | 15 (सभी) | बेहद खराब | भारी गिरावट |
| नगरपालिका | 84 | 78 | 06 | नाममात्र |
| जिला पंचायत | 34 | 33 | 0 | 01 |
| तालुका पंचायत | 260 | 253 | 07 | नगण्य |
सूरत: जहां से शुरू हुआ था सफर, वहीं मिली सबसे बड़ी हार
आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका सूरत नगर निगम से आया है। साल 2021 के निकाय चुनावों में AAP ने सूरत में 27 सीटें जीतकर पूरे देश को चौंका दिया था और मुख्य विपक्षी दल बन गई थी। हालांकि, 2026 के इन चुनावों में AAP का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। पार्टी यहां महज 4 सीटों पर सिमट गई है, जबकि बीजेपी ने 120 में से 115 सीटों पर कब्जा कर लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूरत में आप के पार्षदों का दलबदल और स्थानीय संगठन में गुटबाजी पार्टी की हार का मुख्य कारण बनी।
क्यों विफल रही AAP की रणनीति?
2022 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटें जीतने के बाद AAP को उम्मीद थी कि वह गुजरात में कांग्रेस की जगह ले लेगी। लेकिन इन परिणामों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। विफलता के प्रमुख कारण:
- संगठनात्मक कमजोरी: बूथ स्तर पर बीजेपी की ‘पन्ना प्रमुख’ रणनीति का मुकाबला करने में AAP विफल रही।
- उम्मीदवारों का नाम वापस लेना: चुनाव से ठीक पहले वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में AAP के कई उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए थे, जिसे पार्टी ने बीजेपी का दबाव बताया, लेकिन जनता के बीच इसका संदेश गलत गया।
- चेहरों का अभाव: प्रदेश स्तर पर बड़े चेहरों के दलबदल और राष्ट्रीय नेताओं की सीमित सक्रियता ने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा।
BJP की अजेय बढ़त और PM मोदी का जादू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य में बीजेपी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसका किला अभेद्य है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार की योजनाओं और पन्ना प्रमुखों की मेहनत ने बीजेपी को 76% से ज्यादा का स्ट्राइक रेट दिलाया।
“गुजरात की जनता ने विकास की राजनीति और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर एक बार फिर मुहर लगाई है। यह जीत दिखाती है कि जनता रेवड़ी कल्चर को नकार कर ठोस शासन चुनती है।” — सी.आर.पाटिल, भाजपा नेता
2027 विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?
ये नतीजे बताते हैं कि गुजरात में फिलहाल कोई भी तीसरी शक्ति बीजेपी के विजय रथ को रोकने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस जहां अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है, वहीं AAP के लिए अब 2027 की राह बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। शहरी क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हुई है, जो विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

