यूपी STF को मिली बड़ी सफलता: शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ₹800 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाला मुख्य अभियुक्त गिरफ्तार
लखनऊ/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (UP STF) ने साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई करते हुए उस मास्टरमाइंड को दबोच लिया है, जिसने देश भर के हजारों निवेशकों को अपनी बातों के जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये डकार लिए थे। पकड़े गए मुख्य अभियुक्त की पहचान जितेंद्र राम के रूप में हुई है, जो एक सुनियोजित तरीके से शेयर बाजार, फॉरेक्स (Forex) और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर ठगी का साम्राज्य चला रहा था।
1. कैसे हुई गिरफ्तारी?
एसटीएफ की टीम को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि एक गिरोह ‘सी प्राइम कैपिटल’ (Sea Prime Capital) और ‘एडुकैंडल’ (EduKandle) जैसी संस्थाओं के नाम पर लोगों को ठग रहा है। मुखबिर की सूचना और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर, एसटीएफ ने सहारनपुर के दिल्ली रोड स्थित एक रेस्टोरेंट से जितेंद्र राम को गिरफ्तार किया। वह हरियाणा के यमुनानगर का रहने वाला है।
इसके साथ ही, एक अन्य ऑपरेशन में एसटीएफ ने रुपेश भारद्वाज नामक व्यक्ति को भी गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है, जो ‘X Traders Enterprises’ के नाम से फर्जी ट्रेडिंग फर्म चला रहा था।
2. ठगी का ‘मोडस ऑपेरंडी’ (Modus Operandi)
एसटीएफ की पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह किसी पेशेवर कंपनी की तरह काम करता था:
- फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: अभियुक्तों ने MT-5 (MetaTrader 5) नामक एप्लिकेशन का सहारा लिया। एसटीएफ के अनुसार, यह ऐप भारत में अधिकृत नहीं है। वे इस ऐप पर निवेशकों के फर्जी अकाउंट बनाते थे।
- दिखावटी मुनाफा: ऐप पर निवेशकों को नकली ग्राफ और बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता था ताकि वे और अधिक पैसा निवेश करें।
- विश्वास जीतने की तकनीक: शुरुआत में छोटे निवेशकों को कुछ रिटर्न (मुनाफा) वापस किया जाता था। जब निवेशक का भरोसा जीत लिया जाता और वह लाखों रुपये लगा देता, तो अचानक उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था।
- नेटवर्क: इस गिरोह के पास पूरे भारत में 3,500 से अधिक एजेंट थे और इन्होंने अब तक 30,000 से अधिक यूजर आईडी बनाई थीं।
3. ₹800 करोड़ का साम्राज्य और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच में सामने आया है कि ठगी गई रकम का आंकड़ा 700 से 800 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। यह पैसा केवल भारत में ही नहीं रहा, बल्कि इसे सफेद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रास्तों का इस्तेमाल किया गया:
- क्रिप्टोकरेंसी और हवाला: निवेशकों से लिया गया पैसा शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए घुमाया जाता था और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर दुबई और मॉरीशस जैसे देशों में भेज दिया जाता था।
- विदेशी संपत्तियां: एसटीएफ को शक है कि इस पैसे का इस्तेमाल दुबई में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया है।
4. बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक बरामद किए हैं।
जितेंद्र राम के खिलाफ गाजियाबाद के मसूरी थाने में मामला दर्ज है। पुलिस अब उन 3,500 एजेंटों और अन्य मुख्य साथियों (मोहित राणा, गौरव सिंह और गीता हजारिका) की तलाश कर रही है, जो इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। इस मामले में PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) और FEMA (फेमा) के तहत भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
5. निवेशकों के लिए एसटीएफ की चेतावनी
यूपी एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया (WhatsApp, Telegram, Instagram) पर मिलने वाले “हाई रिटर्न” के विज्ञापनों से बचें। शेयर बाजार में निवेश हमेशा SEBI (सेबी) द्वारा पंजीकृत ब्रोकरों के माध्यम से ही करें। किसी भी अनजान ऐप पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधानिकता की जांच जरूर करें।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य अभियुक्त | जितेंद्र राम (41 वर्ष) |
| गिरोह का नाम | सी प्राइम कैपिटल / एडुकैंडल |
| ठगी की कुल राशि | अनुमानित ₹700-800 करोड़ |
| कुल पीड़ित | 30,000+ निवेशक |
| मुख्य ऐप | MT-5 (अनधिकृत) |
| एजेंटों की संख्या | 3,500 (देशभर में) |

