
लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणदीप रिणवा से मुलाकात करने पहुंचा था. प्रतिनिधिमंडल में आरके वर्मा, पंकज मलिक, कमाल अख्तर, मोहम्मद फहीम सहित कई विधायक मौजूद रहे.
सपा विधायक आरके वर्मा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा जो प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग से मिलने के लिए भेजा था, जो पूरे उत्तर प्रदेश में पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) के क्रम में फॉर्म 7 का दुरुपयोग भाजपा के कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि जो पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक समाज के जो मतदाता हैं उनका फॉर्म 7 कूटरचना करके नाम कटवाने की साजिश चल रही है.
उन्होंने कहा कि हर एक विधानसभा में 30 हजार से लेकर एक-एक लाख तक जो नो मैपिंग के नोटिस दिए गए हैं, एक बीएलओ कितने दिन में निटाएगा? एक विधानसभा में 50 हजार से लेकर 1 लाख नो मैपिंग नोटिस तहसीलों में सुनवाई कैसे हो सकती है? मान लीजिए एक तहसील में दो विधानसभा हैं तो 2 लाख लोगों की सुनवाई इतने कम समय में कैसे हो सकती है?
उन्होंने कहा कि आज हमने प्रमाण दिया कि जिन लोगों के नाम एक से कई जगहों पर हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने कूटरचना करके हमारे मतदाताओं, हमारे समर्थकों का नाम कटवाने की साजिश की, एविडेंस के साथ हमने प्रपत्र भी सौंपे हैं.
उन्होंने कहा कि एक और व्यवस्था की मांग की है कि जो लोग तहसीलों के चक्कर लगाते हैं, तहसीलों पर इतनी भीड़ हो रही है और जो निर्वाचन आयोग ने जो अभिलेख नो मैपिंग में मांगे हैं उन अभिलेखों को उनकी जगहों पर अर्थात ग्राम पंचायतों में बनाने की सुविधा दी जाए. ग्राम पंचायतों में ही सुनवाई की सुविधा दी जाए और उन्हें तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें.
उन्होंने कहा कि जो अधिकारी संबंधित प्रमाण पत्र बनाने में आनाकानी कर रहे हैं उनको स्पष्ट निर्देश दिये जाएं, नहीं तो उनके ऊपर कार्रवाई की जाए, उन्हें हटाया जाए. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह सभी बातों से सहमत हैं.
उन्होंने कहा कि अभी निर्वाचन आयोग यह कह रहा है कि हम आपके सभी सुझाव को स्वीकार करते हैं. सपा विधायक संग्राम यादव ने भी कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने उनकी सभी बातों को गंभीरता से सुना और सुझावों पर संज्ञान लेने का भरोसा दिया.

