उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
तहसील पट्टी के ब्लॉक आसपुर देवसरा अंतर्गत ग्राम पंचायत भीखमपुर निवासी रोजगार सेवक बसंत लाल पासी को बीते 7–8 महीनों से मानदेय नहीं मिला, जिसके चलते वह अपने बच्चों और परिवार का पेट पालने के लिए मटर, नींबू और बैंगन बेचने को मजबूर हो गया।
सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने वाला रोजगार सेवक आज खुद रोजी-रोटी के लिए सड़क पर खड़ा है। मानदेय न मिलने से टूट चुका बसंत लाल पासी अब सब्जी बेचकर जैसे-तैसे परिवार चला रहा है। उसकी यह मजबूरी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही तस्वीरों के जरिए सामने आई है, जिसने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
👉 सवाल यह है कि
आखिर मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण योजना के कर्मचारी को महीनों तक वेतन क्यों नहीं?
क्या रोजगार सेवकों का यही सम्मान है?
जिम्मेदार अधिकारी अब भी कब तक आंख मूंदे बैठे रहेंगे?
सबसे हैरानी की बात यह है कि

