गोरखपुर : बी. पी. मिश्रा

अम्ल अक्रामण पीड़ित के मूल्यांकन एवं प्रमाणन हेतु दिषा निर्देष के विशय पर केन्द्रित थी सी.आर.सी. की 52वीं वेविनार। दिव्यांगता पुनर्वास के क्षेत्र मेें सामान्य रूप से चर्चित दिव्यांगताआंे पर कार्यक्रम होते रहते हैं परन्तु अम्ल आक्रमण पीड़ित पर बहुत कम चर्चा होती है। यहां तक कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में अम्ल अक्रमण पीड़ित को षामिल करने के बाद भी ज्यादा तर चर्चा अन्य दिव्यांगताआंे पर होती रही है। सी.आर.सी. गोरखपुर ने एक विषेश पहल करते हुए अम्ल अक्रामण पीड़ित के मूल्यांकन एवं प्रमाणन हेतु दिषा-निर्देष विशय पर चर्चा की षुरूआत की। जिसके लिए वेविनार श्रृंखला 52 का आयोजन किया। आज के मुख्य अतिथि डाॅ. वाई सिंह, सदस्य विषेशज्ञ समिति भारतीय पुनर्वास परिशद नई दिल्ली, ने कहा कि यदि किसी के ऊपर अम्ल का आक्रमण होता है तो पीड़ित को अम्ल का हमला होने के बाद उसे कम से कम 40 मिनट तक लगातार पानी से धोना चाहिए तथा यथाषीघ्र अस्पताल पहुंचाना चाहिए। आज के कार्यक्रम समन्वयक और वक्ता श्री विजय गुप्ता फिजियोथरेपिस्ट, सी.आर.सी. गोरखपुर ने अम्ल पीड़ित व्यक्ति के प्रमाणन की प्रक्रिया को बताया। प्रमाणन की प्रक्रिया को बताते हुए श्री विजय गुप्ता ने कहा कि जो भी अम्ल पीड़ित व्यक्ति दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाना चाह रहे हों उनको पहले किसी भी जन सुविधा केन्द्र पर जाकर अपना पंजीकरण करवाना पड़ता है।

पंजीकरण के 21 दिन के अन्दर उनको सोमवार के दिन जिला अस्पताल में जाकर प्रमाणन की प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है। प्रक्रिया पूरे होने के बाद प्रमाण-पत्र आॅनलाइन अपलोड हो जाता है जिसे जन सुविधा केन्द्र से जाकर डाउनलोड किया जा सकता ह,ै उसके लिए दुबारा अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। 40 प्रतिषत दिव्यांगता वाले ही बेंच मार्क दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं और वह प्रमाण-पत्र बनवा कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष सी.आर.सी. के निदेषक श्री रमेष कुमार पान्डेय जी ने कहा कि गति विशयक दिव्यांगता के अन्तर्गत अम्ल आक्रमण पीड़ितों के बारे मंे बहुत कम चर्चा होती थी। सी.आर.सी. गोरखपुर गति विशयक दिव्यांगता पर पूरे छः कार्यक्रमों की एक श्रृंखला के माध्यम से अम्ल आक्रमण पीड़ितों के बारे में एक नई चर्चा की षुरूआत की है जो कि समाज में नई जागरूकता का संचार करेगा।  कार्यक्रम समन्यवक विजय गुप्ता ने गति विशयक दिव्यांगता वाले कार्यक्रम की श्रृंखला की रूपरेखा तैयार की है। कार्यक्रम के सह-समन्यवक श्री राजेष कुमार यादव ने प्रष्नोत्तर काल का संचालन किया तथा कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे सभी प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में आॅनलाइन माध्यम से 100 से ज्यादा लोगों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट दिया गया।

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