प्रदेश में सामुदायिक स्तर पर कोरोना का संक्रमण नहीं फैला है। स्वास्थ्य विभाग के प्रदेशस्तरीय सर्वे ने यह बात साबित कर दी है। सूबे के सभी 75 जनपदों में शहरी झुग्गी—झोपड़ियों में की गई रैंडम जांच में 58 जिलों में संक्रमण नहीं पाया गया है।

प्रमुख सचिव-स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने शुक्रवार को सर्वे का खुलासा करते हुए कहा कि रैंडम सैम्पलिंग के तहत सभी 75 जनपदों में शहरों के स्लम एरिया में जाकर कोरोना नमूने लिए गए। बड़े जिलों में 10—10, मध्यम जिलों में 05—05 और छोटे जिलों में 02—02 स्लम एरिया में जाकर रैंडम जांच की गई। उन्होंने बताया कि इसमें 58 जिलों में कोराना संक्रमण नहीं पाया गया। केवल 17 जनपदों में इसकी पुष्टि हुई है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि कुल 3,475 कोरोना नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें से मात्र 65 में संक्रमण की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इन बस्तियों में रहने वाले 1.87 प्रतिशत लोग ही पॉजिटिव पाए गए हैं।

प्रमुख सचिव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलग—अलग इलाकों का जायजा लिया जा रहा है, जिससे घनी बस्ती वाले क्षेत्रों में संक्रमण के स्तर का पता चल सके। इसके साथ ही इस तरह की पहल से लोग कोरोना को लेकर जागरूक भी हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन जनपदों में शहरी झुग्गी—झोपड़ी वाले इलाकों में संक्रमण पाया गया है, वहां और ज्यादा सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कोरोना का फैलाव रोका जा सके।

इन 18 जनपदों में समुदाय में नहीं मिला था संक्रमण

इस सर्वे से पहले प्रदेश के 18 जनपदों झांसी, कौशाम्बी, प्रयागराज, आजमगढ़, बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बस्ती, चित्रकूट, जालौन, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, महाराजगंज, मीरजापुर, संतकबीर नगर, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती में रैंडम जांच की गई थी और यहां सामुदायिक संक्रमण नहीं मिला था।
इन जिलों में ऐसे 72 गांवों जहां अधिक प्रवासी कामगार आए थे, वहां इन लोगों के आने के 15 दिन से ज्यादा का समय गुजरने के बाद प्रवासी कामगारों के बजाय 1,686 सामान्य नागरिकों की कोरोना जांच की गई, जिससे समुदाय में संक्रमण के स्तर का पता चल सके। इनमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

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