कोविड-19 महामारी और संक्रमण से रोकथाम के लिए लगे लॉक डाउन के चलते घर से ऑनलाइन मोड में कक्षाओं के आयोजन और चलाये जा रहे शैक्षणिक सत्र को लेकर देश भर के टीचर्स और पैरेंट्स ने असंतोषजनक प्रतिक्रियायें दी हैं। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा सोमवार, 16 नवंबर को जारी एक फील्ड स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन टीचिंग अप्रभावी और अपर्याप्त है। यूनिवर्सिटी द्वारा 5 राज्यों के 26 जिलों में 1,522 स्कूलों में फील्ड स्टडी की गयी है। इन स्कूलों में 80 हजार से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।ऑनलाइन शिक्षा को लेकर टीचर्स और स्टूडेंट्स के अनुभव को जानने के उद्देश्य से फील्ड स्टडी की गयी। यूनिवर्सिटी द्वारा जारी स्टेटमेंट के अनुसार, फील्ड स्टडी के दौरान अधिकतर टीचर्स और पैरेट्स ऑनलाइन मोड को शिक्षा के लिए अप्रभावी और अपर्याप्त ही बताते रहे। इन पैरेट्स का कहना था कि वे अपने बच्चों को जरूरी स्वास्थ्य सावधानियों के साथ स्कूल भेजने को तैयार हैं और वे उन्हें नहीं लगता है कि बच्चों को स्कूल भेजने से स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या होगी।अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के वॉयस चांसलर अनुराग बेहर के अनुसार, “ऑनलाइन शिक्षा, विशेषतौर पर स्कूली-उम्र बच्चों के लिए, सिर्फ इंटरनेट और ऑनलाइन रिसोर्स की कमी से ही नहीं, बल्कि शिक्षा की मूल-प्रकृति के कारण भी अप्रभावी है।” उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए फिजिकल प्रेजेंस, अटेंशन, थॉट और इमोशंस जरूरी हैं। ये सभी मिलकर चरणबद्ध तरीके से हर बच्चे के लिए सीखने के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद करते हैं।वॉयस चांसलर ने टीचर और स्टूडेंट के बीच मौखिक और गैर-मौखिक बातचीत को शिक्षा के लिए जरूरी बताया, जो कि परंपरागत कक्षाओं के जरिए ही संभव है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार 80 फीसदी शिक्षकों ने ऑनलाइन एजुकेशन में बच्चों के साथ ‘इमोशनल कनेक्ट’ को असंभव बताया, जबकि 90 फीसदी अध्यापकों को लगा कि ऑनलाइन क्लासेस के दौरान बच्चों का सार्थक मूल्यांकन नहीं पाता है।

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