यह सिर्फ धरना नहीं है…यह हमारे सम्मान, हमारी आस्था और हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।
हमारे पूज्य महापुरुषों का अपमान केवल शब्दों का अपमान नहीं,बल्कि पूरे कश्यप, निषाद, मछुआ एवं संबंधित समाज की आत्मा पर चोट है।
इको गार्डन की धरती आज गवाह है —मां-बहनों की आंखों में आंसू भी हैं और आग भी…उनका एक ही सवाल है क्या हमारे महापुरुषों का सम्मान सुरक्षित नहीं क्या हमारे समाज की आवाज कोई नहीं सुनेगा
स्पष्ट चेतावनीयदि हमारी मांगों को अनदेखा किया गया,यदि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा माफी नहीं मांगी गई…
तो यह आंदोलन और उग्र होगा,और पूरे प्रदेश में अपनी ताकत दिखाएगा!
हमारा संकल्प साफ है —जब तक सम्मान नहीं… तब तक विराम नहीं!जब तक न्याय नहीं… तब तक संघर्ष जारी रहेगा!
समाज से अपीलअब समय आ गया है कि हम सब एकजुट होकर खड़े हों।ज्यादा से ज्यादा संख्या में इको गार्डन पहुंचें,और इस आंदोलन को जनआंदोलन बनाएं।
अब यह सिर्फ धरना नहीं…यह हमारे स्वाभिमान की जंग है!

