गोरखपुर : बी. पी. मिश्रा

विकासात्मक दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों को रोजमर्रा के कामों में शामिल कर उनकी ज्ञानेन्द्रियों को विकसित होने का अवसर दें।  यह बातें मुख्यवक्ता के तौर पर डाॅ एस मुरली कृश्णन, प्रधानाध्यापक मीनाक्षी एकेडमी आॅफ हायर एजूकेषन एंड रिसर्च, चैन्नै ने कही । अपनी बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे को दैनिक क्रियाओं में षामिल करें तथा उसे अधिक-से अधिक अपना काम स्वयं करने दे ंतो निष्चय ही उसमें एक सकारात्मक बदलाव आयेगा। आज कल हर अभिभावक व्यवहारात्मक समस्या से ग्रसित बच्चों को अपने अनुसार नियंत्रित करना चाहता है जबकि उनकों बच्चे को एक सुरक्षात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए ओर अधिकतम उसके व्यवहार को देखना चाहिए जिससे कि उसका कोई षारीरिक नुकसान न हो।

सी.आर.सी गोरखपुर दिव्यांगजनों तक जानकारी पहुंचाने के लिए लगातार ई-परामर्ष श्रृंखला का आयोजन कर रहा है। आज की 15वी ई-परामर्ष श्रृंखला में विकासात्मक दिव्यांगता वाले बच्चों मेे होने वाली व्यवहारात्मक समस्या को लेकर थी । इस श्रृंखला का आयोजन सी.आर.सी. गोरखपुर के विकासात्मक चिकित्सा विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम समन्वयक सी.आर.सी. के विकासात्मक चिकित्सक श्री संजय प्रताप सिंह ने इस फील्ड के विषेशज्ञों को इस श्रृंखला हेतु आमंत्रित किया था। जिसमंे मुख्य अतिथि सक्षम के राश्ट्रीय अध्यक्ष, डाॅ. दयाल सिंह पवार तथा विषिश्ट अतिथि राजेष राम चन्द्रन पुनर्वास अधिकारी एन.आई.ई.पी.एम.डी. चैन्नै, थे।

सी.आर.सी. के निदेषक श्री रमेष कुमार पान्डेय जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम के दौरान श्री पाण्डेय जी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पूर्वांचल के अभिभावकोें तक उनकी जानकारियों को पहुंचाने के लिए उनका धन्यवाद् किया। अपनी बात रखते हुए निदेषक महोदय ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने सबसे ज्यादा दिव्यांगजनों को प्रभावित किया है ऐसे में विकासात्मक दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों मंे व्यवहारात्मक समस्या आना बहुत आम बात है। सी.आर.सी. के विषेश षिक्षा विभाग के श्री नीरज मधुकर जी, सहायक प्राध्यापक ने सभी अतिथियों तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर सी.आर.सी. के सभी अधिकारी और कर्मचारी गण उपस्थिति रहे। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट दिया गया।

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